“विद्या विना विनयः, विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥”
शिक्षा मानव जीवन का वह आलोक है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक एवं संस्कार की ज्योति प्रज्वलित करती है। शिक्षा का परम उद्देश्य केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित न होकर व्यक्तित्व के समग्र विकास एवं समाज तथा राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व-बोध का निर्माण करना है।
स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मलिकपुरा, गाज़ीपुर में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं सह-पाठ्यक्रमीय गतिविधियों को समान महत्व दिया जाता है। यह महाविद्यालय विद्यार्थियों के चिंतन, रचनात्मकता और बौद्धिक अभिव्यक्ति को निरंतर प्रोत्साहित करता है। लेखन, वाचन, वाद-विवाद, कविता एवं अकादमिक विमर्श जैसे मंचों के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों का विकास किया जाता है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह शैक्षणिक वातावरण अध्यापन, शोध एवं विद्यार्थी सहभागिता के समन्वय से एक सशक्त अकादमिक मंच के रूप में निरंतर विकसित होता रहेगा। यहाँ से प्राप्त ज्ञान और संस्कार विद्यार्थियों को समाज-निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभाने हेतु प्रेरित करेंगे।
मैं महाविद्यालय परिवार के समस्त शिक्षकगण, कर्मचारीवृंद एवं विद्यार्थियों के निरंतर प्रयासों की सराहना करता हूँ तथा आशा करता हूँ कि सभी के सहयोग से यह संस्थान शिक्षा की उच्च परंपराओं को सुदृढ़ करता हुआ नवीन उपलब्धियों की ओर अग्रसर रहेगा।
सभी को शुभकामनाएँ।
प्रो. (डॉ.) दिवाकर सिंह
प्राचार्य